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होंडा ने टाटा टेक्नोलॉजीज से मिलाया हाथ:भारत में कार बनाने का क्या मास्टरप्लान बनाया?

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जापानी वाहन निर्माता कंपनी होंडा मोटर (Honda Motor) ने भारतीय बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए टाटा ग्रुप की इंजीनियरिंग फर्म टाटा टेक्नोलॉजीज (Tata Technologies) के साथ एक बड़ा आउटसोर्सिंग समझौता किया है।

सूत्रों के मुताबिक, इस साझेदारी के तहत होंडा का मुख्य लक्ष्य अपनी उत्पादन लागत में 20 प्रतिशत तक की कटौती करना और नई गाड़ियों के डेवलपमेंट समय को मौजूदा 5 साल से घटाकर आधा (लगभग 2.5 साल) करना है। प्रतिस्पर्धा के बढ़ते दबाव और अकेले काम करने की रणनीति की सीमाओं को देखते हुए जापानी दिग्गज ने यह कदम उठाया है।

वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) से जुड़े घाटे और खर्चों में कटौती की कवायद के बीच होंडा अब पेट्रोल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड मॉडल्स पर ध्यान केंद्रित कर रही है। पिछले महीने रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि होंडा अगले चार वर्षों में 9 अरब डॉलर से अधिक की लागत घटाने की कोशिश कर रही है। और उसने अपने सप्लायर्स से कीमतों में बड़ी कटौती करने को कहा है।

क्या होंडा के जापानी और भारतीय मैनेजमेंट के बीच सप्लायर रणनीति को लेकर मतभेद था?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साझेदारी से पहले होंडा के जापानी और भारतीय प्रबंधकों के बीच आगामी वाहनों के लिए सप्लायर्स के चयन को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी:

    • जापानी मैनेजमेंट का रुख: जापानी टीम गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने के लिए अपने स्थापित (पुराने) सप्लायर्स पर ही निर्भर रहना चाहती थी।

    • भारतीय मैनेजमेंट की मांग: भारत की टीम लागत कम करने और भारत जैसे तीसरे सबसे बड़े ऑटो बाजार में तेजी से काम करने के लिए स्थानीय सप्लायर्स के अधिक उपयोग का पक्ष ले रही थी।

कंपनी ने विवाद की खबरों को खारिज करते हुए इसे टीमों के बीच का स्वाभाविक “सहयोगात्मक विचार-विमर्श” बताया है। हालांकि, स्थानीय बाजार की गहरी समझ और व्यापक लोकल सप्लायर नेटवर्क के कारण ही टाटा टेक्नोलॉजीज को इस काम के लिए चुना गया है। वाहन की गुणवत्ता, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और ड्राइविंग टेक्नोलॉजी पर होंडा का ही सीधा नियंत्रण रहेगा।

भारतीय बाजार में होंडा की मौजूदा स्थिति कैसी है और इसे बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?

एक समय भारतीय ऑटो बाजार में 7.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाली होंडा का मार्केट शेयर आज घटकर मात्र 1.3 प्रतिशत रह गया है।

चुनौतियों के मुख्य कारण:

    • सीमित पोर्टफोलियो: भारत में होंडा का पोर्टफोलियो सिमटकर केवल 4 मॉडल्स तक रह गया है।

    • ओवर-इंजीनियरिंग और कीमत: कंपनी अब तक जापान या वैश्विक बाजारों के लिए डिजाइन की गई कारों को भारतीय बाजार के हिसाब से मॉडिफाई करके बेचती थी, जिससे गाड़ियां ग्राहकों को जरूरत से ज्यादा महंगी लगती थीं।

    • SUV सेगमेंट में पकड़ की कमी: भारतीय बाजार के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते SUV सेगमेंट में टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले होंडा काफी पीछे छूट गई है।

होंडा के अध्यक्ष तोशीहिरो मीबे ने भी स्वीकार किया है कि भारत कंपनी के लिए एक प्रमुख केंद्र है, लेकिन वे हमेशा यहां सफल नहीं रहे हैं। इसीलिए अब पूरे व्यापार मॉडल को एक नए सिरे से खड़ा किया जा रहा है।

टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर होंडा कौन सी नई गाड़ियां लॉन्च करने की योजना बना रही है?

टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी के तहत होंडा भारतीय ग्राहकों के स्वाद और बजट को ध्यान में रखते हुए नई SUV रेंज पर काम कर रही है:

    • सब-4 मीटर कॉम्पैक्ट SUV: साझेदारी के तहत पहला प्रोडक्ट एक सब-4 मीटर (यानी 4 मीटर से छोटी) कॉम्पैक्ट SUV होगी। यह सेगमेंट भारतीय ऑटो बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसे 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

    • मिड-साइज SUV और सेडान: पहली SUV के बाद कंपनी एक मिड-साइज SUV पेश करेगी। इसके बाद होंडा सेडान सेगमेंट में अपनी पुरानी मजबूत पकड़ को दोबारा हासिल करने का प्रयास करेगी।

अगर इस साझेदारी का पहला उत्पाद गुणवत्ता, बिक्री और मुनाफे के पैमाने पर खरा उतरता है, तो होंडा भारत को अपने वैश्विक बाजारों के लिए एक प्रमुख एक्सपोर्ट हब के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है।

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